Sunday, 25 March 2012

साक्षात्कार ..........




पढिये एक सामान्य लड़की का मन ............

सामरा काज़मी  का साक्षात्कार ..........
"जियो तो हजरत अली के तरह .
  मरो तो इमाम हुसैन की तरह."  
हमेशा इन शब्दों को प्रेरणा मानने वाली एक सामान्य लड़की की दांस्ता .....आपके समक्ष प्रस्तुत कर रही हूँ , जी हाँ ये है सामरा काज़मी   है जो जल्द ही उभरती हुई पत्रकार के रूप में हमारे सामने आने वाली है .जिनकी सोच आज उन्हें भीड़ से अलग करती है  १.३० घंटे चले  इस साक्षात्कार में सामरा जी ने अपने जीवन के कई पक्षों को हमारे सामने रखा वक्त के इस आईने में पेश है उनकी कुछ झलकियाँ .........

सामरा काजमी




























































































































:व्यक्तित्व व जीवन से जुड़े कुछ प्रश्नों के साथ मेरा (अर्चना चतुर्वेदी ) और उत्तरों के साथ सामरा काज़मी के साक्षात्कार का  दौर कुछ यूँ चला ..........
प्र. सामरा जी आप क्या है ? अपने लिए 

उ. जी,  मै खुद के लिए कुछ नहीं हूँ जो भी हूँ दूसरो के लिए.  आप कह सकती है की समारा काज़मी
एक ऐसी लड़की है जिसको खुद से ज्यादा उसके करीबी जानते है . और जो कुछ भी जानती हूँ अपने बारे में उसके हिसाब से मै बहुत कन्फयूज़ लड़की हूँ ,जल्दी किसी पे भी भरोसा कर लेती हूँ ,हंसमुख हूँ अब और क्या बताऊ ? बस ऐसी ही हूँ मै .

प्र. कुछ बताये की आपके जीवन का शुरुवाती दौर कैसा बीता ?कहने का मतलब है की आपके परिवार वालो के साथ . 

उ. मेरे जीवन में मुझसे ज्यादा अहमियत मेरे परिवार वाले रखते है उन्होंने मेरे हर कदम पर मेरा साथ दिया है तभी जीवन के ये शुरुवाती पल इतने खुबसूरत बन गये है ..जब हम कानपुर में रहा करते थे तब हमे याद है. 199२ में  अयोध्या कांड चल रहा था तब हमे बहुत सी  परेशानियों का सामना करना पड़ा यहाँ तक की हमे कानपुर छोड़ कर लखनऊ आना पड़ा लेकिन हमारे अब्बा (एस.एस.एच काज़मी ) के अच्छे स्वभाव की वजह से हमारे हिन्दू पड़ोसियों ने हमारा खूब साथ दिया और यही संस्कार हमे भी दिए ..लखनऊ आने के बाद घर के हालात ठीक नहीं रहे पर फिर भी मेरे घरवालो ने मिलकर इस मुश्किल का सामना किया और अल्लाह का शुक्र है की अब हम सब बहुत खुश है. 

प्र. कौन -कौन है आपके परिवार में ?  आप सबसे ज्यादा करीब किस से है घर पे और क्यों ?

अब्बा ,मैं और अम्मी
अप्पी ,मैं मेरी बहन
और ये मेरा स्टुडेंट 

उ. जी, हम छः लोग है अम्मी ,अब्बा और चार बहने है जिनमे से बड़ी वाली आप्पी की शादी हो गई है और अब हम पांच लोग है अब्बा BSNL में काम करते है अम्मी लेक्चरार है शिया कॉलेज में और अप्पी भी जॉब करती है कुल मिलकर हमारा छोटा  परिवार सुखी परिवार है ..मै आपने घर पे सुबसे ज्यादा अपनी अम्मी से करीब हूँ क्योकि वो मेरी लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है उन्होंने जिन हालातो में अपनी पढाई पूरी की वो वाकई काबिलेतारीफ है साथ ही वो मुझे बहुत मदद्त करती है हर चीज़ के लिए  मेरी सबसे बड़ी अप्पी (सना) वो भी मुझे ये लगने ही नहीं देती की वो हमसे दूर है .मेरे परिवार में हर इसी की अपनी एहमियत है इसीलिए मै सबकी इज्ज़त करती हूँ .

प्र. आपको लोग घर में और दोस्तों में किस नाम से बुलाते है ?

उ. जी अच्छा सवाल है मुझे घर पे लोग  सम्मो के नाम से बुलाते है और मुझे पसंद भी ये नाम अपना पन सा  झलकता है इस नाम में कुछ  भी बनावटी  नहीं लगता ......और दोस्तों में तो लोग मुझे "सोडा बोटल" बुलाते है क्योकि उनको लगता है की मै बहुत जल्दी हायपर हो जाती हूँ ..
प्र. आप ने अपनी पढाई कहाँ से की ? प्राइमरी से लेकर आज मास्टर तक का आपका सफ़र कैसा रहा?

उ. मेरी पढाई लखनऊ में हुई और अब भी चल रही है शुरूवात में मैं ज्यादा अच्छी नहीं थी पढाई में अब्बू भी कहते थे " अल्लाह ही जाने कैसे पास होती है "  १० वे में भी  ज्यादा तो नहीं पर  हा पास होने भर नम्बर मिल गये थे पर धीरे - धीरे सुधरती रही उसके ब&